Shayariya

Spread the love

मुझे मत चाहो तुम

कोई गिला नहीं

बस चिलमन से झाँकते रहना

ज़माने को जलाने के लिये

काफ़ी है कि तेरी नज़र मुझ पर है💓

—00—

जो कहा जाता है अक्सर अनसुना करते हैं

जो कहना चाहिए हमें वो कह नहीं पाते हैं

क्या अजीब सी कशमकश है इस दिल की

बस फरियाद करके सब्र बेहिसाब करते है

—00—

उसकी  बातें  है  फुहार  जैसी

लगती   फूलों   के  हार  जैसी

जाने  कब  दिल को भिगो गई

रिमझिम  झड़ी  बेशुमार जैसी

खामोशी चुभती कांटों  के जैसी

घड़ी बोलती है खर्राटों  के जैसी

उधेड़ बुन में गुजरता बेकार दिन

गुलजार होती यादें हाटों के जैसी

—00—

हिला  जाती  दिल  को  नाराजगी

चली  जाती  रुखसार की ताजगी

उसके माथे की  शिकन  है डराती

ये अजीब बातें अब यहां होने लगी

—00—

हर कोई प्यासा होता है,

हर कोई मगर रिंद होता नहीं…

जो बसते है साहिल पे,

क्या,प्यासा कभी वो होता नहीं ?…

—00—

बावफा था ये दिल फिर भी हार गया

बेवफाई उसकी कितना मुस्कुरा रही है

—00—

छू लो अपने नर्म हाथों से फिर एक बार मुझको

के मेरे बदन से तेरी महक अब छूटने लगी है..!!❤️

—00—

अगर उनकी मर्जी हो तो किसी गैर को अपना लें,

हम उनकी खुशी में ही अपनी खुशी समझेंगे।

—00—

पूछा जो उसने इश्क क्या है..?

हमने भी कह दिया,

बस एक अफवाह जो उडती रहती है

तुम्हारे और मेरे दरमियां…!!

—00—

तू वजह है जीने की।

ये वजह है पीने की।

तू ही बता, कितना पिएं।

तेरे बिन कैसे जिएं।

—00—

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह..

न हमको फुर्सत मिली..

न उन्हें मेरा ख्याल आया..

—00—

ज़हर तो खामख्वाह ही बदनाम है..

नज़र घुमा कर देख लो..

शक्कर से मरने वालों की तादाद बेशुमार हैं..

—00—

कुछ लोग खोने को प्यार कहते हैं

तो कुछ पाने को प्यार कहते हैं💘💕

💞💘पर हकीक़त तो ये है.

हम तो बस निभाने को प्यार कहते हैँ.

—00—

दिल 💓ने कहा की

कोई याद कर रहा है

मैने सोचा 💞दिल💓

मजाक कर रहा है

फिर जब आई हिचकी

तो ख्याल आया

की कोई अपना ही

मेसेज का इंतजार

कर रहा है ।।

—00—

कितने आये,

कितने भुलाये गये..

ना जाने कँहा से मिले तुम,

ना गये, ना भुलाये गये..

—00—

शीशा और पत्थर संग संग रहे तो बात नहीं घबराने की……..

शर्त इतनी है कि बस दोनों ज़िद ना करे टकराने की……..✍🏻

—00—

कैसे कहें कुछ भी कहा नहीं जाता,

दर्द मिलता है पर सहा नहीं जाता,

हो गया है इश्क आपसे बे-इन्तिहाँ

कि अब तो बिन देखे आपको जिया नहीं जाता।

—00—

मत मुस्कुराओ इतना की फूलो को खबर लग जाये,

हम करें आपकी तारीफ और आपको नजर लग जाये

—00—

खुदा करे बहुत लम्बी हो आपकी जिंदगी ,

और उस पर भी हमारी उम्र लग जाये….

—00—

बिना कहे जो सब कुछ

कह जाते हैं

बिना कसूर के जो सब कुछ

सह जाते हैं

दूर रह कर भी अपना फर्ज

निभाते हैं

वही रिश्ते सच में अपने

कहलाते हैं

—00—

मिल जाता है दो पल का सुकून

बंद आँखों की बंदगी में

वरना थोड़ा-थोड़ा परेशां तो

हर शख़्स है अपनी जिंदगी में।

—00—

कभी यूं भी आओ मेरे #करीब तुम,

मेरा #इश्क़ मुझे खुदा लगे।

मेरी #रूह में तुम उतरो जरा,

मुझे #अपना भी कुछ पता लगे।

#कैद हो जाऊं ऐसे तेरी #बाहों में,

इस तरह ना #रात की खबर,

ना #दिन का पता लगे|

—00—

ज़िंदगी एक रात है

जिसमें ना जाने कितने ख्वाब हैं

जो मिल गया वो अपना हैं

जो टूट गया वो सपना हैँ।

—00—

ना था कुछ तो खुदा था,

कुछ ना होता तो खुदा होता,

जब कुछ नहीं होगा तो खुदा होगा,

मैं करता हूं खुदा की बंदगी,

खुदा मेरी अरज कबूल करे।

—00—

!! जमाने को हमसे शिकायत बहुत है,

कि हमे जी हुजूरी आती नहीं है,

कोशिश बड़ी की झुकाने की सिर को,

पर करे क्या, ये खुद्दारी जाती नहीं है.

—00—

उन्होंने वक़्त समझकर गुज़ार दिया हमको..

और हम उनको ज़िन्दगी समझकर आज भी जी रहे हैं..!!

—00—

तरक्की मिल रही है शायरी में हमें ,

तुम्हारा जिक्र मंहगा बिक रहा है!!

—00—

तुम्हारी आंखें पढ़ कर,

हमने ग़ज़लें सीखी है,

तुम्हारी मोहब्बत से,

हमने शायरी सीखी है,

जिक्र तुम्हारा करता भी नहीं,

फिर भी लोग पूछते हैं,

उसका नाम तो बताऊं,

जिससे तुमने यह बाते सीखी हैं।

—00—

ये क्या तुम फिर से ख़यालों में आ गए..!

सुबह, सुबह हमको कोई काम नहीं क्या..!

—00—

तेरी खामोशी में मेरी मोहब्बत बोलती है…..

तेरे नाम के सजदे में..मेरी इबादत बोलती है

रिश्ता ये कैसा…तेरा मुझसे…………………

जिंदगी तेरी है और सांसें मेरी चलती हैं…..।

—00—

किरदार महकता है उसका मोहब्बत से

हमारी ,,

बदन में उनके कोई गूलाब थोड़े ही है…!

इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए,

तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है…!!

किसी फूल ने इतनी खुशबू नहीं,

जितना मुझे में तुम महकती हो..

—00—

तूने मोहब्बत, मोहब्बत से ज्यादा की थी,

मैंने मोहब्बत तुझसे भी ज्यादा की थी,

अब किसे कहोगे मोहब्बत की इन्तेहाँ,

हमने शुरुआत ही इन्तेहाँ से ज्यादा की थी।

—00—